बाढ़ आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए 4-5 अरब डॉलर जुटाएगी नेपाल सरकार, भारत-चीन और विश्व बैंक से चल रही बातचीत

काठमांडू। नेपाल सरकार ने भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए जरूरी 4 से 5 अरब डॉलर की राशि जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने शुक्रवार को सिंहदरबार में हिमालय में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, जलवायु न्याय और भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा से संबंधित संसदीय विशेष समिति की बैठक में कहा कि सरकार भारत, चीन, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के साथ बातचीत कर रही है। अगले तीन से पांच वर्षों में आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि कुल आवश्यक राशि का करीब 80 प्रतिशत इन चार स्रोतों से जुटाया जा सकेगा। शेष 20 प्रतिशत राशि अन्य विकास साझेदारों और दानदाता एजेंसियों से प्राप्त करने की योजना है। वित्त मंत्री के अनुसार पुनर्निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए भारत के साथ विशेष वित्तीय सहायता पैकेज को लेकर बातचीत चल रही है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की आगामी भारत यात्रा के दौरान इस संबंध में कुछ समझौते हो सकते हैं। वाग्ले ने बताया कि चीन के साथ बातचीत में आपदा के बाद पुनर्निर्माण, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास और वैकल्पिक व्यापारिक नाकों के विस्तार जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसमें रसुवागढ़ी, तातोपानी और कोरला सीमा नाकों को जोड़ने वाले बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा हो रही है। इसके तहत रेलवे, सुरंग, वायडक्ट (ऊंचे पुलनुमा मार्ग) और आधुनिक सीमा शुल्क सुविधाओं के निर्माण की योजना है।
उन्होंने कहा कि नेपाल चीन से जुड़ने वाली अपनी पुरानी सड़कों को केवल सामान्य मरम्मत तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उनका उन्नयन करना चाहता है। वाग्ले ने बताया कि पुनर्निर्माण के लिए जरूरी वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन को लेकर विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के साथ भी गहन बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि 39 वर्षों में पहली बार नेपाल के किसी वित्त मंत्री ने सीधे विश्व बैंक के अध्यक्ष से मुलाकात की है। इस मुलाकात से उच्चस्तरीय सहयोग के लिए एक नया आधार तैयार हुआ है। वित्त मंत्री के मुताबिक विश्व बैंक की विभिन्न संस्थाओं और रियायती वित्तपोषण व्यवस्थाओं के माध्यम से जरूरत के अनुसार करीब एक अरब डॉलर तक की वित्तीय प्रतिबद्धता हासिल करने का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि एशियाई विकास बैंक से भी इसी तरह के सहयोग की उम्मीद है।वाग्ले ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनुदान सहायता में कमी आ रही है। ऐसे में रियायती ऋण का इस्तेमाल भी बेहद सावधानी और समझदारी से करना होगा। उन्होंने कहा कि नेपाल पहले अपनी विकास परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता पर काफी निर्भर रहता था, लेकिन अब इस तरह की सहायता लगातार घट रही है।
