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‘छोरी 2’ के एक साल: नुसरत भरुचा के साहसी चुनाव ही बनाते हैं उनकी अलग पहचान

मुंबई।  फिल्म ‘छोरी 2’ को रिलीज़ हुए एक साल हो गया है, लेकिन आज भी नुसरत भरुचा की परफॉर्मेंस को काफी याद किया जाता है और उसकी वजह है उनका कुछ अलग करने का चुनाव है। आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में जहां कलाकार अक्सर उसी रास्ते पर चलते हैं, जो काम कर रहा हो, वहां नुसरत ने धीरे-धीरे उस दायरे से बाहर निकलने का फैसला किया। ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ और ‘ड्रीम गर्ल’ जैसी फिल्मों से एक जाना पहचाना चेहरा बनने के बावजूद, उन्होंने उसी स्पेस में बने रहने की बजाय ‘छोरी’ के साथ एक बड़ा मोड़ लिया और यह मोड़ था एक फीमेल-लीड हॉरर फिल्म का, जो लगभग पूरी तरह उनकी परफॉर्मेंस पर टिकी थी। हालांकि ‘छोरी 2’ के साथ उन्होंने इस सफर को और आगे बढ़ाया, जहां कहानी ज्यादा इंटेंस और इमोशन से भरपूर हो गई। ‘छोरी 2’ को रिलीज़ हुए आज एक साल हुए हैं और आज भी यह फिल्म उनके दर्शकों के मन में जस की तस बनी हुई है और उसकी वजह है नुशरत भरुचा की पर्फोर्मंस। ‘छोरी’ और ‘छोरी 2’ की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि नुसरत सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि उन्होंने उसे अपने कंधों पर उठाया। उनका किरदार साक्षी एक टिपिकल कमर्शियल हीरोइन जैसा नहीं है, जो बेबाक और निडर है। वह कमजोर भी है और डरी हुई भी, लेकिन अंदर से मजबूत भी है और यही बैलेंस कहानी को दिलचस्प बनाता है। ‘छोरी 2’ में यह इमोशनल गहराई और भी अहम हो जाती है, क्योंकि फिल्म ज्यादा डार्क और साइकोलॉजिकल टेरिटरी में जाती है, और नुशरत हर मुश्किल मोमेंट को मजबूती से संभालती नजर आती हैं।

यदि नुसरत के फिल्मी चुनावों को देखा जाए, तो एक साफ पैटर्न नजर आता है और वो ये है कि वे सेफ खेलने के बजाय, हमेशा से ऐसे रोल चुनती आई हैं, जिनमें एक तरह का रिस्क शामिल हो। चाहे ‘जनहित में जारी’ हो के जरिए सामाजिक मुद्दे को उठाना हो या ‘छोरी’ और छोरी 2′ के जरिए हॉरर में एक मजबूत मैसेज के साथ एक्सपेरिमेंट करना हो, उन्होंने रिपीट करने की बजाय एक्सप्लोर करने का रास्ता चुना है।फिर भी, इन सबके बावजूद, वह अक्सर सबसे ज्यादा शोर-शराबे वाली चर्चाओं का हिस्सा नहीं बनतीं। शायद इसलिए क्योंकि उनका बदलाव अचानक या ओवर-मार्केटेड नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे और नेचुरल तरीके से हुआ है। लेकिन यही बात उनके सफर को खास भी बनाती है। यह किसी प्लान्ड रीइंवेंशन जैसा नहीं, बल्कि एक ऑर्गेनिक ग्रोथ जैसा लगता है। आज ‘छोरी 2’ के एक साल बाद, नुसरत भरुचा एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में सामने आती हैं, जो अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर जाने से नहीं डरतीं। ऐसे समय में जब दर्शक नए जॉनर और मजबूत कहानियों के लिए ज्यादा खुले हैं, उनका यह अप्रोच उनकी क्रेडिबिलिटी को और मजबूत बनाता है। वह शायद हर वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला नाम न हों, लेकिन अपने चुनावों के जरिए नुशरत भरुचा लगातार अपनी एक अलग और खास जगह बना रही हैं।