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आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में दोहरे मानदंड बर्दाश्त नहींः अजीत डोभाल

मॉस्को।  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को घोषणा की कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में ‘दोहरे मानदंड’ बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। इसके साथ ही उन्होंने सभी देशों से आतंकवादी समूहों के साथ-साथ उन्हें प्रायोजित या वित्तपोषित करने वाले देशों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया। रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से बातचीत के दौरान श्री डोभाल ने कहा, “हम अपनी पूरी ताकत से आतंकवाद को कुचलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जैसा कि रूस भी है। भारत और रूस अपनी पूरी ताकत से आतंकवाद के खिलाफ लड़ेंगे। मॉस्को में आयोजित ‘प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच’ और ‘सुरक्षा मामलों के लिए जिम्मेदार उच्च पदस्थ अधिकारियों की 14वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक’ को संबोधित करते हुए श्री डोभाल ने कहा कि आतंकवाद ‘अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक’ बना हुआ है और उन्होंने इस पर अधिक वैश्विक जवाबदेही तय करने की मांग की। सुरक्षा सलाहकार ने कहा, “आतंकवाद से लड़ना हर देश की जिम्मेदारी है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं हो सकते।” उन्होंने कहा कि जिम्मेदार देशों को स्पष्ट रूप से यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद का समर्थन करते हैं या उसका विरोध करते हैं।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए श्री डोभाल ने कहा कि भारत बार-बार ‘राज्य-प्रायोजित आतंकवाद’ का शिकार हुआ है। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि पीड़ितों को ‘उनके धर्म के आधार पर अलग किया गया और मार दिया गया’, तथा पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। श्री डोभाल ने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस रुख के अनुरूप थी, जिसके तहत आतंकवादी हमलों के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “उसी संदर्भ में भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। उल्लेखनीय है कि इस हमले के बाद भारत ने सात मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ प्रमुख आतंकवादी ठिकाने नष्ट कर दिए गए और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।

व्यापक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर श्री डोभाल ने कहा कि दुनिया वर्तमान में जारी संघर्षों, अनिश्चितता और व्यापार तथा प्रौद्योगिकी में व्यवधानों के कारण ‘संरचनात्मक भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता’ का सामना कर रही है। सुरक्षा सलाहकार ने कहा, “दुनिया एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है, जो अनिश्चितता से भरा है। ऐसे माहौल में, हमारी दीर्घकालिक रणनीतिक और विशेष साझेदारी की विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री डोभाल ने एक बहुध्रुवीय दुनिया के उभरने का वर्णन किया जिसमें उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं अपनी सैन्य, आर्थिक और जनसांख्यिकीय क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘सत्ता अब कुछ ही हाथों में केंद्रित नहीं है… उभरते हुए देश दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक स्थिर अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ की समान भागीदारी आवश्यक है। सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि मॉस्को मंच, जिसमें सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के 140 से अधिक प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, बदलते सुरक्षा परिदृश्य और चुनौतियों पर बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस चर्चा से आपसी समझ गहरी होगी और वैश्विक सुरक्षा खतरों से निपटने में सहयोग मजबूत होगा।