अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट ईरानी मिसाइल ठिकानों पर बमबारी की

वाशिंगटन। अमेरिका के सैन्य बलों ने ईरान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी केन्द्रीय कमान ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह जानकारी दी। कमान ने कहा, “कुछ घंटे पहले अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित सुदृढ़ (हार्डन) ईरानी मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के गहरे पैठ बनाने वाले कई बमों का सफलतापूर्वक उपयोग किया। कमान के अनुसार, “इन ठिकानों पर मौजूद ईरानी एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा मानी जा रही थीं। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संवाददाताओं से कहा कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ अपने हमले समाप्त करने के लिए “अभी तैयार नहीं” है और यह अभियान अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।
श्री ट्रम्प ने यह भी स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही के लिए संयुक्त एस्कॉर्ट मिशन का उनका प्रस्ताव अधिकांश नाटो देशों और अमेरिकी सहयोगियों ने अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने इस पर निराशा जताते हुए कहा कि अमेरिका को “किसी की मदद की आवश्यकता नहीं” है। उन्होंने कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य “युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा,” हालांकि उन्होंने इसके बारे में अधिक विवरण नहीं दिया। जेपी मॉर्गन की एक हालिया रिपोर्ट में विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है तो पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देश अधिकतम 25 दिनों तक ही उत्पादन बनाए रख सकेंगे।
सऊदी अरब, इराक, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और स्वयं ईरान अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए इस संकरे मार्ग पर निर्भर हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले सप्ताह अमेरिकी मीडिया से कहा था कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के सिवाय अन्य के लिए जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे, जिससे वैश्विक नौवहन प्रभावित हुआ, तेल की कीमतों में तेजी आई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।
