पंजाब विस चुनाव में राजग और सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा

नयी दिल्ली, 

पंजाब विधानसभा चुनाव के लिये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा तय हो गया है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 65, कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस 37 और सुखदेव सिंह ढींढसा की अकाली दल संयुक्त 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सोमवार को यहाँ भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने संवाददाता सम्मेलन में तीनों पार्टी के बीच हुए सीट बंटवारे को लेकर जानकारी दी। श्री नड्डा ने कहा कि पंजाब का यह चुनाव अगली पीढ़ियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाला चुनाव है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद पंजाब को दोबारा विकास और स्थिरता की पटरी पर लाना है। श्री नड्डा ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1984 दंगों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और आज आरोपी जेल में हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में राजग की सरकार बनती है तो पंजाब में चल रहे ड्रग, भू-माफिया, रेत माफिया और आतंकवाद को खत्म कर दिया जाएगा। श्री नड्डा ने कहा, “पंजाब पाकिस्तान की सीमा से सटा राज्य है। इसलिए देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पंजाब में एक स्थिर और मजबूत सरकार का होना बहुत जरूरी है। पाकिस्तान हमेशा ही हमारे देश में पंजाब के रास्ते अशांति फैलाने की कोशिश करता रहा है यह बात किसी से छुपी नहीं है। हमने यह भी देखा है कि कैसे सीमापार से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी करने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि पंजाब में स्थायित्व और विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच अच्छे रिश्ते होना ज़रूरी है। सीट बंटवारे की घोषणा के समय भाजपा अध्यक्ष के साथ मंच पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, श्री ढींडसा और केंद्रीय मंत्री और पंजाब चुनाव के प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे।


इस मौके पर कैप्टन सिंह ने कहा, “मैं पंजाब की मौजूदा सरकार में साढ़े चार साल मुख्यमंत्री रहा। इस दौरान वहां से कई अवैध राइफल, पिस्टल, आरडीएक्स और गोला बारूद मिलते रहे। यह सब पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए कुछ खास जगहों पर गिराए किए गए थे। ड्रोन सीमा से 31 किमी भीतर तक हथियार और ड्रग्स की आपूर्ति करने लगे थे। इसीलिए जब सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र का दायरा 15 किमी से 50 किमी बढ़ाने का फ़ैसला हुआ तो इसका विरोध करने वालों को मैंने ड्रोन के खतरे के बारे में बताया। श्री ढींढसा ने कहा, “पंजाब की हालत बहुत खराब है। राज्य में उद्योग पलायन कर रहे है। खेतीबाड़ी पर भी बहुत कर्ज हो गया। राज्य पर तीन लाख करोड़ से ज्यादा कर्जा है। कोई ऐसा साधन भी नहीं है कि पंजाब दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। इसलिए हम तीनों दलों ने इकट्‌ठे होकर बात की है। पंजाब चुनाव में हिंदू-सिख का मसला खड़ा किया जाता है। उसे ठीक रखने के लिए हम एकजुट हुए हैं। पंजाब का माहौल ठीक रखेंगे। उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों पर मतभेद के बाद पंजाब में लंबे समय से भाजपा की सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने अलग राह चुन ली। शिअद के राजग से अलग होने के बाद भाजपा पहली बार बड़े भाई की भूमिका में नए सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में है। कांग्रेस के एक फैसले के चलते कैप्टन सिंह की पंजाब में मुख्यमंत्री पद से विदाई हो गयी लिहाजा उनके लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न है। दूसरी ओर पार्टी से मतभेद के चलते शिअद के वरिष्ठ नेता रहे श्री ढींढसा अलग पार्टी बनाकर राजग से गठजोड करके अपनी किस्मत आजमा रहे हैं । राज्य में 20 फरवरी को मतदाता होना है।

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