टॉप-न्यूज़दिल्ली/एनसीआरराज्यराष्ट्रीय

उच्चतम न्यायालय ने केजरीवाल, अतिशी की मानहानि मामले में राहत देने संबंधी याचिका पर सुनवाई की

नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और अतिशी मार्लेना की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के संबंध में की गयी टिप्पणी के बाद दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में राहत का आग्रह किया था। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ‘आप’ नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि 18 अगस्त के पिछले आदेश के माध्यम से न्यायालय ने निर्देश दिया था कि मामले को ‘नॉन-मिसलेनियस’ (गैर-विविध) दिन पर सूचीबद्ध किया जाए।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्तमान मामला कांग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ उनके ‘बिच्छू’ वाले बयान से जुड़े लंबित आपराधिक मानहानि मामले के समान है, जिसकी सुनवाई फरवरी में होनी है। इस आधार पर सुश्री अरोड़ा ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग की। याचिका का विरोध करते हुए केन्द्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता एस.वी. राजू ने दलील दी कि वर्तमान मामला एक राजनीतिक दल की मानहानि से जुड़ा है और शिकायत उस व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई है जिसे पार्टी ने विधिवत अधिकृत किया है। उन्होंने तर्क दिया कि यह मुद्दा न्यायिक मिसाल के माध्यम से पूरी तरह स्थापित है और इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

एक अन्य अधिवक्ता ने दलील दी कि श्री थरूर के मामले से जुड़े मुद्दे पूरी तरह अलग हैं और दोनों मामलों को एक साथ जोड़ने का कोई औचित्य नहीं है। सुश्री अरोड़ा ने अपनी दलील दोहराते हुए कहा कि दोनों मामलों में शिकायतकर्ता एक ही है, इसलिए कानून के सामान्य प्रश्न समान हैं। पीठ हालांकि मामलों को एक साथ जोड़ने के पक्ष में नहीं थी। न्यायालय ने टिप्पणी की कि वर्तमान मामले को शशि थरूर के मामले के साथ जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है और इस अनुरोध को खारिज कर दिया। पक्षकारों को समय देते हुए पीठ ने जवाब दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। यह आपराधिक मानहानि मामला ‘आप’ नेताओं द्वारा दिए गए उन सार्वजनिक बयानों से उपजा है, जिनमें दिल्ली में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि ये बयान मानहानिकारक हैं। उच्चतम न्यायालय फिलहाल इस आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की चुनौती पर विचार कर रहा है।