मोदी रविवार को करेंगे वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

नयी दिल्ली। विशिष्ट औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए इस बार गुजरात में चार वाइब्रेंट क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित कर राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को नयी गति प्रदान की जाएगी। कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के औाद्योगिक विकास के लिए इस बार अलग वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को राजकोट में मारवाड़ी यूनिवर्सिटी में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के लिए वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे। वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस 11 से 12 जनवरी तक कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के 12 जिलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। विशेष रूप से इन क्षेत्रों को समर्पित, इस सम्मेलन का उद्देश्य पश्चिमी गुजरात में निवेश और औद्योगिक विकास के लिए नई गति प्रदान करना है। इस सम्मेलन के मुख्य क्षेत्रों में इस बार सिरेमिक, इंजीनियरिंग, बंदरगाह विकास और लॉजिस्टिक्स, मत्स्य पालन, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, परिस्थितिकी, कौशल विकास, स्टार्टअप, एमएसएमई, पर्यटन और संस्कृति शामिल हैं। जापान, दक्षिण कोरिया, रवांडा और यूक्रेन इस सम्मेलन के लिए भागीदार देश होंगे।
औद्योगिक विकास के वाइब्रेंट गुजरात के सफल मॉडल को और प्रभावी बनाने के लिए पूरे राज्य में इस बार चार वाइब्रेंट रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जा रहे हैं। इससे पहले उत्तर गुजरात क्षेत्र के लिए रीजनल कॉन्फ्रेंस का पहला संस्करण गत 9-10 अक्टूबर को मेहसाणा में आयोजित किया गया। वर्तमान संस्करण कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित किया जा रहा है और इसके बाद दक्षिण गुजरात 9-10 अप्रैल और मध्य गुजरात में 10-11 जून को क्रमशः सूरत और वडोदरा में ये सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप और वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की सफलता और विरासत को आगे बढ़ाते हुए, इन रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना और वैश्विक जुड़ाव को बढ़ाना है। वाइब्रेंट गुजरात मंच को सीधे क्षेत्रों (रीजन) तक ले जाकर, यह पहल विकेंद्रीकृत विकास, व्यापार करने में सुगमता, इनोवेशन-आधारित विकास और स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने पर प्रधानमंत्री के जोर को भी दर्शाती है।
