किसान का पैसा रोकने पर भरना होगा 12 फीसदी ब्याज : शिवराज

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसान को देर से भुगतान और सरकारी खातों में पैसा रोक रखकर लाभ कमाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा। श्री चौहान ने आज यहां आयोजित पूसा कृषि विज्ञान मेले में आए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और अगर किसी योजना में राज्यों की ओर से भुगतान में देरी होती है तो भी केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर काम किया जा रहा है। कृषि तकनीकी पर मिल रही सहायता का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 18 से अधिक योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन केवल पैसा भेज देना काफी नहीं है। उन्होंने एक मिसाल देते हुए बताया कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में नाम होने के बावजूद 158 किसानों को मशीनें मिली ही नहीं। जब केंद्र पैसा देता है तो यह भी देखना उसकी जिम्मेदारी है कि लाभ असली किसान तक पहुँचा या नहीं, और इसके लिए मजबूत निगरानी प्रणाली होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज का लाभ मिल रहा है और प्रभावी चार प्रतिशत ब्याज दर पर सस्ता ऋण उपलब्ध है, लेकिन इसमें भी देरी अस्वीकार्य है। उन्होंने वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से अपेक्षा जताई कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े ऋण समय पर और बिना अनावश्यक कागजी देरी के जारी किए जाएँ, ताकि किसान साहूकारों पर निर्भर न रहें। कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि केवीके को जिले की एक सशक्त इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अनुसंधान और एक्सटेंशन के बीच सेतु का काम करे। उन्होंने संकेत दिया कि पेस्टिसाइड लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जायेगा ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद जल्दी बाजार में आए और घटिया व नकली उत्पादों पर सख्त रोक लग सके।
श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार खाद पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है, ताकि किसान को 2400 रुपये की वास्तविक लागत वाली यूरिया की बोरी सिर्फ लगभग 265–270 रुपये में मिल सके। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार होना चाहिए कि इतनी बड़ी सब्सिडी यदि सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के रूप में दी जाए तो किसान स्वयं तय कर सकेगा कि कौन–सा उर्वरक कितनी मात्रा में खरीदना है, और यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि सब्सिडी का वास्तविक लाभार्थी वही अन्नदाता हो जो खेत में खाद डाल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान को खरीफ से पहले अप्रैल से समयबद्ध रूप से चलाया जाएगा, जिससे किसान समय रहते वैज्ञानिक सलाह और बेहतर बीज–तकनीक का लाभ उठा सकें।
