नाग पंचमी पर इन मंत्रों के जाप से होगा कालसर्प योग दूर

कालसर्प दोष दूर करने के मंत्र 

नाग पंचमी पर कालसर्प दोष से ग्रस्‍त लोग विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करें और कुछ विशेष मंत्रों का जाप करें तो उन्‍हें इसके कष्‍टकारी प्रभाव से मुक्ति मिल सकती है। कालसर्प दोष या राहु की शांति के लिए पूजन के बाद ईश्वर से प्रार्थना करते हुए नाग गायत्री मंत्र ‘ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्’ का जाप कालसर्प दोष को दूर करने में कारगर सिद्ध होता है। इसके अतिरिक्‍त नागपंचमी पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नागदेवताय नम:’ मंत्र का जप किया जाए तो द्रुतगति से व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति होती हैा इस मंत्र का प्रयोग भी दिन में 108 बार करना चाहिए।

नाग पंचमी से जुड़े तथ्‍य 

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी नागों को समर्पित है और इस दिन श्रद्धा पूर्वक पूर्वक नागों का पूजन अर्चन करना चाहिए वेदों और पुराणों में नागों की उत्पत्ति महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रो से मानी गई है नागों का मूल स्थान पाताल लोक माना जाता है। शास्‍त्रों के अनुसार नागों से त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्‍णु महेश तीनों ही प्रेम करते हैं।  पुराणों में भगवान सूर्य के रथ में भी द्वादश नागों का उल्लेख मिलता है। भगवान कृष्ण का शेषनाग से प्रेम किसी से छुपा नहीं है। ब्रह्मा जी ने नाग पंचमी तिथि को श्रेष्‍ठ बताते हुए सावन शुक्ल पंचमी को वरदान दिया था और आस्तिक मुनि ने भी इसी दिन नागों की रक्षा की थी  अतः नाग पंचमी का यह पर्व अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन एक बार ही भोजन करने का नियम है। पृथ्वी पर नागों का चित्रांकन किया जाता है और मिट्टी से नाग बना करके पुष्‍प, फल, धूप, दीप एवं विविध प्रकार से इस दिन पूजन किया जाता है। नाग पंचमी के दिन विशेष रूप से संतान प्राप्ति, कालसर्प दोष, कुष्ठ रोग, क्षय रोग, लक्ष्‍मी प्राप्‍त करने और किसी भी प्रकार के भीषण कष्‍ट से मुक्ति के लिए पूजन किया जाता है।