विकासशील देशों को उठाना चाहिए डिजिटल तकनीकी का लाभः मोदी

जोहानसबर्ग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि डिजिटल तकनीकी में क्रांति से चौतरफा विकास के नये अवसर खुले हैं और विकासशील देशों को इस तकनीकी का समुचित उपयोग करके इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए। श्री मोदी ने शुक्रवार को यहां बिक्स-अफ्रीकी आउटरीच और ब्रिक्स-पल्स आउटरीच सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, डिजिटल क्षेत्र में तकनीकी क्रांति ने नये अवसर प्रदान किये हैं। हम औद्योगिक क्रांति के पहले चरण के अवसर से चुक गये हैं लेकिन हम अब अवसर के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं।

चार सालों में हमारे आर्थिक संबंध और विकास सहयोग नयी ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं

श्री मोदी ने कहा,अफ्रीका के साथ भारत के संबध ऐतिहासिक और गहरे हैं। अफ्रीका में स्वतंत्रता, विकास और शांति के लिए भारत के ऐतिहासिक प्रयासों के विस्तार को मेरी सरकार ने सर्वाधिक महत्व दिया है। पिछले चार सालों में हमारे आर्थिक संबंध और विकास सहयोग नयी ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। आज 40 से अधिक अफ़्रीकी देशों में 11अरब डॉलर से अधिक की 180 लाइन्स ऑफ क्रेडिट जारी हैं। बुधवार को युगांडा की संसद को संबोधित करते हुए मैंने भारत और अफ्रीका की साझेदारी के 10 सिद्धांतों की विस्तार से चर्चा की। ये सिद्धांत अफ्रीका की आवश्यकतानुसार विकास के लिए सहयोग, शांति और दोनों देशों के बीच सैंकड़ों साल पुराने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश हैं।
इस वर्ष सम्मेलन का विषय‘चौथी औद्योगिक क्रांति में विकासशील देशों का समावेशी विकास और साझा समृद्धि’है।

ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका इसके पांच सदस्य देश हैं

श्री मोदी के अलावा इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी मौजूद हैं। ब्रिक्स की स्थापना 2009 में हुई थी और ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका इसके पांच सदस्य देश हैं। श्री मोदी ने कहा, मैं अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहल के लिए सभी अफ़रीकी देशों  हार्दिक बधाई देता हूँ। अफ्रीका में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए हो रहे प्रयासों का भी मैं स्वागत करता हूँ। मुक्त व्यापार एवं वाणिज्य ने पिछले तीन दशकों में कई लाख लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।

औपनिवेशिक काल में औद्योगिक प्रगति के अवसरों का लाभ नहीं उठा पाए

वैश्वीकरण और विकास के लाभ को लोगों तक पहुँचाना इस प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा था।
उन्होंने कहा कि 2008 के आर्थिक संकट के बाद से वैश्वीकरण के इस मूलभूत पहलू पर संरक्षणवाद के बादल मंडरा रहे हैं। इस प्रवृति का और विकास दर में मंदी का सबसे गहरा प्रभाव भारत जैसे उन देशों पर पड़ा है जो औपनिवेशिक काल में औद्योगिक प्रगति के अवसरों का लाभ नहीं उठा पाए। उन्होंने कहा, आज हम एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। डिजिटल क्रांति से हमारे लिए नयी संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं।

भारत की अपनी विकास यात्रा में साउथ-साउथ कोआपरेशन एक प्रमुख आधार रहा है

श्री मोदी ने कहा,साझेदार देशों के विकास में भारत पूरा सहयोग करता रहा है। साउथ-साउथ कोआपरेशन के अंतर्गत अपने विकास अनुभवों को साझा करके अन्य विकासशील देशों में तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता विकास में हर संभव मदद हमारी विदेश नीति का अहम हिस्सा है। भारत की अपनी विकास यात्रा में साउथ-साउथ कोआपरेशन एक प्रमुख आधार रहा है। अपने विकास अनुभव को विकासशील देशों के साथ साझा करना भारत की प्राथमिकता रही है, और भविष्य में भी रहेगी।