भारत-दक्षिण कोरिया के बीच सात समझौतों पर करार

नयी दिल्ली
भारत दौरे पर आए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की। जिस दौरान दोनों के बीच सात समझौतों पर करार हुआ। दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप के हालातों पर भी बातचीत हुई। बातचीत के बाद संवाददाताओं के समक्ष संयुक्त बयान में पीएम ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति प्रक्रिया में भारत एक पक्षकार है और क्षेत्र में शांति के लिये हमारा योगदान जारी रहेगा।
मोदी ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति प्रक्रिया शुरू करने का श्रेय राष्ट्रपति मून को जाता है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि जो सकारात्मक वातावरण बना है, वह राष्ट्रपति मून के अथक प्रयासों का परिणाम है। पूर्वोत्तर और दक्षिण एशिया में प्रसार संबंध (परमाणु) भारत के लिये भी चिंता का विषय है। इसलिये इस शांति प्रक्रिया में भारत भी एक पक्षकार है। तनाव कम करने के लिये जो हो सकेगा, हम वह करेंगे। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने कहा कि हमने द्विपक्षीय सहयोग के नये युग की शुरुआत की है। वहीं, मोदी ने कहा कि हमारी बातचीत के परिणामस्वरूप एक दृष्टि पत्र जारी किया जा रहा है। हमारा ध्यान अपने विशेष सामरिक गठजोड़ को मजबूत करने पर है। इससे पहले मून और उनकी पत्नी किम जुंग सूक का आज दिल्ली में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में मून को गार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया। जिस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पीएम मोदी भी मौजूद रहे। कोविंद ने साउथ कोरियन राष्ट्रपति के सम्मान में एक डिनर का आयोजन भी किया है। मून की इस भारत यात्रा का मकसद व्यापार और रक्षा सहयोग को बढ़ाना है। सोमवार को राष्ट्रपति मून और पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सैमसंग के सबसे बड़े मोबाइल प्लांट को लॉन्च किया। इस दौरान दोनों ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन मैन्युफैख्रिंग में आज भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। उनके मुताबिक नोएडा में 5 हजार करोड़ रुपए का ये निवेश ना सिर्फ सैमसंग के भारत में व्यापारिक रिश्तों को मजबूत बनाएगा, बल्कि भारत और कोरिया के संबंधों के लिए भी अहम सिद्ध होगा।